रविवार, 19 जून 2011

भारत बनाम भ्रष्टाचार: जन की गुहार जन-लोकपाल


http://www.indiaagainstcorruption.org/
एक चतुर नाग,
करे शत-प्रहार,
मुँह फाड़-फाड़,
डँसे बार-बार।
जन चीत्कार करे बार-बार,
मचे हाहाकार,
आह! अत्याचार
ये दण्डप्रहार के बहाने हजार,
ये लोकाचार का बलात्कार,
यहाँ भ्रष्टाचार! वहाँ भ्रष्टाचार!
अँधी सरकार! चहुँ अँधकार!
भारत बीमार, रोग दुर्निवार।


जन अब हमारी सुन ले पुकार,
पारदर्शिता की यह बयार
बहती हीं जाये, रुक्के न यार
मंथन करें, कर लें विचार,
जनता की माँग जन-लोकपाल,
जन की तलवार जन-लोकपाल
यह नव-संग्राम, दूषण संहार,
भ्रष्टों की हार, जन-लोकपाल।
अन्ना, किरण और केजरीवाल,
समरांत तक मानें न हार
India Against Corruption march (30th Jan, 2011)
कहो बार-बार, चीखो बार-बार,
जन की गुहार जन-लोकपाल,
अंतिम सवाल अब आर-पार,
जन-लोकपाल या मृत्युद्वार,
मद्द में चिंघार, जन-लोकपाल
जन-लोकपाल!  जन-लोकपाल!  – प्रकाश ‘पंकज’
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