
यह कविता अनुभूति पर भी प्रकाशित: http://www.anubhuti-hindi.org/nayihawa/p/prakash_pankaj/index.htm
पंकज-पत्र का एक पक्ष पंकिल दूसरा पक्ष निर्मल। पंकिल शब्दों द्वारा निर्मल सन्देश पहुँचाने का एक प्रयास। यदि मेरी ये पंकिल कविताएँ आपको निर्मल लगीं और पसंद आई तो इस पते(लिंक) को मित्रों में भी अवश्य बांटें, आपका आभारी रहूँगा। - प्रकाश ‘पंकज’ | © सर्वाधिकार सुरक्षित
Very good!!
जवाब देंहटाएंAanand aa gaya.
कर्म पथ पर चलना ही मानव के वश मे है....यही जीवन को राह दिखता है....
जवाब देंहटाएंआपकी कविता से बहुतों का कल्याण हो सकता है.....कृपया आप इन्हे युवा वर्ग की पत्रिकाओं जैसे जोश, दिशा , लक्ष्य आदि मे प्रकाशित करवाएँ ....
मैने आपकी कविता दिल्ली के अनेक मित्रों को भेजी जिसका जोश के साथ स्वागत हुआ....सभी की ओर से पंकज जी को धन्यवाद...
आज ही आपके ब्लॉग में प्रवेश किया, ओर आपकी ये कविता पड़ी, बहुत अच्छी लगी...
जवाब देंहटाएंमैं अपने कुछ दोस्तों को ये कविता भेजना चाहूंगी अगर आपकी इजाजत ही तो ..
dhanyabaad lata jee ...apka swagat hai..
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