शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

दरिद्र नारायण

सूखी रोटी, पवन हिलोरे,
नभ चादर, थल शैय्या।
मेरे दरिद्र नारायण भईया।

टूटी झोपड़, फूस की नथिया,
बाबा की टूटी नईया ।
मेरे दरिद्र नारायण भईया।

बाल जटीला, खाल मटीला,
न बकरी न गैया।
मेरे दरिद्र नारायण भईया।

हल न कुदाली, पतोह रुदाली,
साहू माँगे रूपैया।
कहे दरिद्र नारायण भईया।

खाली खजाना, एक न दाना,
कबहू न आवे गोरैया
कहे दरिद्र नारायण भईया।

खून जलावै, शहर कमावै,
थक-हारे आवै सईंया।
मेरे दरिद्र नारायण भईया।

सर्दी आवे दुरदिन लावे,
ठण्ड कँपावे मईया।
कहे दरिद्र नारायण भईया।

गुदरी खोजे, फूस जोरावे,
आग-अंगीठी दुहरिया।
ओ दरिद्र नारायण भईया।

होली आवे, रंग उड़ावे,
अपनी बेरंगी दुनिया।
कहे दरिद्र नारायण भईया।

साले-साले होलिका जारे,
जले न हमरी दुखिया।
कहे दरिद्र नारायण भईया।

माघ डरावे, माथ जरावे,
खोजे पीपल छईंया।
मेरे दरिद्र नारायण भईया।

आँख के पानी, माथ पसीना,
कौनो अंतर न भईया,
ओ दरिद्र नारायण भईया।

बरसा आवे, मही जुरावे,
घर फूटी उल्टी नईया।
मेरे दरिद्र नारायण भईया।

घर में पोखर, भींगे ओखल,
खाटन ऊपर खेवईया,
कहे दरिद्र नारायण भईया।

छठ-देवारी हमारी दुआरी,
कैसे होवे भईया।
पूछे दरिद्र नारायण भईया।

पास न आवत, खूब छकावत,
नगद नारायण भईया।
 
कहे दरिद्र नारायण भईया।

कहे कहानी, अपनी जुबानी,
हरिहरनाथ गवैया।
ओ दरिद्र नारायण भईया।

बाप खेवैया, पूत गवैया,

दुःख नाचे ता-ता-थइया।
गावे दरिद्र नारायण भईया। – प्रकाश ‘पंकज’



Courtesy: Google Image Search (wired.com/wp-content/uploads/2014/08/43.jpg)

24 टिप्‍पणियां:

  1. हर शब्द अपनी दास्ताँ बयां कर रहा है आगे कुछ कहने की गुंजाईश ही कहाँ है बधाई स्वीकारें

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  2. ....... बहुत दिनो के बाद आपको लिखते देखकर खुशी हुई।

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  3. वाह लजवाब रचना ... बहुत मज़ा आया ...

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  4. बहुत समय बाद-

    बहुत बढ़िया,,,,

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  5. हर छंद सच्चाई बयान कर रहा है ...

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  6. Very nice and contemporary comment on the plight of poor people, feudalism vs socialism fight is still going on

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  7. Very nice and contemporary comment on the plight of poor people, feudalism vs socialism fight is still going on

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  8. Very nice and contemporary comment on the plight of poor people, feudalism vs socialism fight is still going on

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  9. Bahut hi hridaye sparshak.. Abhi recently 2 Maine ka India tour kiya villages mai.. Bas vahi yaad aaya.... Pura scene.. Best lines.. Wchi I cud relate to.. Were. Aakh mai paani maath paseena.. Kohni na antar bhaiyaaaa. ..

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  10. खुशी हुई, लाजवाब लिखा बधाई स्वीकारें

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  11. बहुत सुंदर प्रकाश। इसी तरह से लिखते रहे।

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  12. जिंदगी कि सचाई, .....प्रकाश पंकज कि रचना |

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  13. NamsKaar. . .Bhai . .

    it always feel good n full to read in Hindi. . . straight discipline pen work bhai. . . manywhere i relate my self. . . kp it up. . .good work.

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  14. आपको भी नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ । ये देखकर अति हर्ष हो रहा है कि आपने संपर्क किया ये जानकर आपको आश्चर्य होगा कि हमारी पिछली चैट २१ जनवरी २०११ को हुई थी । मै ही ज्यादा सक्रिय नहीं रहा फेसबुक पर । आपकी रचना पढी अति सुंदर दरिद्र नारायण को चरितार्थ करती दिल को छू गयी । एक बार फिर धन्यवाद यूँ ही स्नेह बनाए रखे

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  15. आपकी कविता अच्छी लगी ऐसे ही लिखते रहे .....

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  16. यार वाकई में बहुत अच्छा लिखा है.....

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  17. Bahut hi badiya itna bhavvibhor aur kalatmak kalam tumahara hi ho sakta hai

    Do u mind if I shade it across using fb and whatsapp

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  18. Bahut achhe Pankaj ji ... kuchh shabdon ka arth samjh nahi aaya ek bilkul nahi shaili ki kavita hai aapki

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  19. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 08 अक्टूबर 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद! .

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