
पंकज-पत्र का एक पक्ष पंकिल दूसरा पक्ष निर्मल। पंकिल शब्दों द्वारा निर्मल सन्देश पहुँचाने का एक प्रयास। यदि मेरी ये पंकिल कविताएँ आपको निर्मल लगीं और पसंद आई तो इस पते(लिंक) को मित्रों में भी अवश्य बांटें, आपका आभारी रहूँगा। - प्रकाश ‘पंकज’ | © सर्वाधिकार सुरक्षित
ITs very nice.i really think its very close to reality...
जवाब देंहटाएंHumm .. quite thoughtful .. was thorughly engrossed by the subject .. good work ..
जवाब देंहटाएंtruly brilliant..
जवाब देंहटाएंkeep writing........all the best
duttkar bhari is duniya se wo apne man ko jeet chala!
जवाब देंहटाएंचमक भरी इस दुनिया से फिर एक सितारा टूट चला।
wah bahut khoob kaha